भगवन्! उन ससुर और दामादमें इतना विद्वेष कैसे हो गया, जिसके कारण सतीने अपने दुस्त्यज प्राणोंतककी बलि दे दी? यह आप मुझसे कहिये॥ ३॥
एतदाख्याहि मे ब्रह्मन् जामातुः श्वशुरस्य च।
विद्वेषस्तु यतः प्राणांस्तत्यजे दुस्त्यजान्सती॥ ३
भगवन्! उन ससुर और दामादमें इतना विद्वेष कैसे हो गया, जिसके कारण सतीने अपने दुस्त्यज प्राणोंतककी बलि दे दी? यह आप मुझसे कहिये॥ ३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.2.3 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 412) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/2/3/