अदृष्टाय नमस्कृत्य नृपः सन्दर्शितात्मने।
अव्यक्ताय च देवानां देवाय स्वपुरं ययौ॥ ३८
तदनन्तर अपना स्वरूप दिखाकर अन्तर्धान हुए अव्यक्तस्वरूप देवाधिदेव भगवान्को नमस्कार करके राजा पृथु भी अपनी राजधानीमें चले आये॥ ३८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.20.38 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 505) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/20/38/