॥ श्रीहरिः ॥
तस्य मे तदनुष्ठानाद्यानाहुर्ब्रह्मवादिनः।
लोकाः स्युः कामसन्दोहा यस्य तुष्यति दिष्टदृक्॥ २३
tasya me tadanuṣṭhānādyānāhurbrahmavādinaḥ|
lokāḥ syuḥ kāmasandohā yasya tuṣyati diṣṭadṛk|| 23
अर्थ
अतः इनका यथावत् पालन करनेसे मुझे उन्हीं मनोरथ पूर्ण करनेवाले लोकोंकी प्राप्ति होनी चाहिये, जो वेदवादी मुनियोंके मतानुसार सम्पूर्ण कर्मोंके साक्षी श्रीहरिके प्रसन्न होनेपर मिलते हैं॥ २३॥✎ 408
तस्य मे तदनुष्ठानाद्यानाहुर्ब्रह्मवादिनः।
लोकाः स्युः कामसन्दोहा यस्य तुष्यति दिष्टदृक्॥ २३
अतः इनका यथावत् पालन करनेसे मुझे उन्हीं मनोरथ पूर्ण करनेवाले लोकोंकी प्राप्ति होनी चाहिये, जो वेदवादी मुनियोंके मतानुसार सम्पूर्ण कर्मोंके साक्षी श्रीहरिके प्रसन्न होनेपर मिलते हैं॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.21.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 508) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/21/23/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
- #408 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् को → भगवान्को