॥ श्रीहरिः ॥
अद्य नस्तमसः पारस्त्वयोपासादितः प्रभो।
भ्राम्यतां नष्टदृष्टीनां कर्मभिर्दैवसंज्ञितैः॥ ५१
adya nastamasaḥ pārastvayopāsāditaḥ prabho|
bhrāmyatāṃ naṣṭadṛṣṭīnāṃ karmabhirdaivasaṃjñitaiḥ|| 51
अर्थ
हमलोग प्रारब्धवश विवेकहीन होकर संसारारण्यमें भटक रहे थे; सो प्रभो! आज आपने हमें इस अज्ञानान्धकारके पार पहुँचा दिया॥ ५१॥
अद्य नस्तमसः पारस्त्वयोपासादितः प्रभो।
भ्राम्यतां नष्टदृष्टीनां कर्मभिर्दैवसंज्ञितैः॥ ५१
हमलोग प्रारब्धवश विवेकहीन होकर संसारारण्यमें भटक रहे थे; सो प्रभो! आज आपने हमें इस अज्ञानान्धकारके पार पहुँचा दिया॥ ५१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.21.51 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 511) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/21/51/