फिर जब अन्तकाल उपस्थित हुआ तो वीरवर पृथुने अपने चित्तको दृढ़तापूर्वक परमात्मामें स्थिर कर ब्रह्मभावमें स्थित हो अपना शरीर त्याग दिया॥ १३॥
एवं स वीरप्रवरः संयोज्यात्मानमात्मनि।
ब्रह्मभूतो दृढं काले तत्याज स्वं कलेवरम्॥ १३
फिर जब अन्तकाल उपस्थित हुआ तो वीरवर पृथुने अपने चित्तको दृढ़तापूर्वक परमात्मामें स्थिर कर ब्रह्मभावमें स्थित हो अपना शरीर त्याग दिया॥ १३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.23.13 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 521) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/23/13/