श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.23.24

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

कुर्वत्यः कुसुमासारं तस्मिन्मन्दरसानुनि।

नदत्स्वमरतूर्येषु गृणन्ति स्म परस्परम्॥ २४

kurvatyaḥ kusumāsāraṃ tasminmandarasānuni|

nadatsvamaratūryeṣu gṛṇanti sma parasparam|| 24

अर्थ

वहाँ देवताओंके बाजे बजने लगे। उस समय उस मन्दराचलके शिखरपर वे देवांगनाएँ पुष्पोंकी वर्षा करती हुई आपसमें इस प्रकार कहने लगीं॥ २४॥

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