श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.24.1

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

पृथुकी वंशपरम्परा और प्रचेताओंको भगवान् रुद्रका उपदेश

मैत्रेय उवाच

विजिताश्वोऽधिराजाऽऽसीत्पृथुपुत्रः पृथुश्रवाः।

यवीयोभ्योऽददात्काष्ठा भ्रातृभ्यो भ्रातृवत्सलः॥ १

vijitāśvo'dhirājā''sītpṛthuputraḥ pṛthuśravāḥ|

yavīyobhyo'dadātkāṣṭhā bhrātṛbhyo bhrātṛvatsalaḥ|| 1

अर्थ

श्रीमैत्रेयजी कहते हैं—विदुरजी! महाराज पृथुके बाद उनके पुत्र परम यशस्वी विजिताश्‍व राजा हुए। उनका अपने छोटे भाइयोंपर बड़ा स्नेह था, इसलिये उन्होंने चारोंको एक-एक दिशाका अधिकार सौंप दिया॥ १॥

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