॥ श्रीहरिः ॥
तत्र गान्धर्वमाकर्ण्य दिव्यमार्गमनोहरम्।
विसिस्म्यू राजपुत्रास्ते मृदंगपणवाद्यनु॥ २३
tatra gāndharvamākarṇya divyamārgamanoharam|
visismyū rājaputrāste mṛdaṃgapaṇavādyanu|| 23
अर्थ
वहाँ मृदंग, पणव आदि बाजोंके साथ अनेकों दिव्य राग-रागिनियोंके क्रमसे गायनकी मधुर ध्वनि सुनकर उन राजकुमारोंको बड़ा आश्चर्य हुआ॥ २३॥
तत्र गान्धर्वमाकर्ण्य दिव्यमार्गमनोहरम्।
विसिस्म्यू राजपुत्रास्ते मृदंगपणवाद्यनु॥ २३
वहाँ मृदंग, पणव आदि बाजोंके साथ अनेकों दिव्य राग-रागिनियोंके क्रमसे गायनकी मधुर ध्वनि सुनकर उन राजकुमारोंको बड़ा आश्चर्य हुआ॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.24.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 526) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/24/23/