उन्होंने इन्द्रसे अन्तर्धान होनेकी शक्ति प्राप्त की थी, इसलिये उन्हें ‘अन्तर्धान’ भी कहते थे। उनकी पत्नीका नाम शिखण्डिनी था। उससे उनके तीन सुपुत्र हुए॥ ३॥
अन्तर्धानगतिं शक्राल्लब्ध्वान्तर्धानसंज्ञितः।
अपत्यत्रयमाधत्त शिखण्डिन्यां सुसम्मतम्॥ ३
उन्होंने इन्द्रसे अन्तर्धान होनेकी शक्ति प्राप्त की थी, इसलिये उन्हें ‘अन्तर्धान’ भी कहते थे। उनकी पत्नीका नाम शिखण्डिनी था। उससे उनके तीन सुपुत्र हुए॥ ३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.24.3 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 524) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/24/3/