श्रीनारदजीने कहा—वीरवर! जब राजा पुरंजनने अधीर-से होकर इस प्रकार याचना की, तब उस बालाने भी हँसते हुए उसका अनुमोदन किया। वह भी राजाको देखकर मोहित हो चुकी थी॥ ३२॥✎ 13361337
इत्थं पुरंजनं नारी याचमानमधीरवत्।
अभ्यनन्दत तं वीरं हसन्ती वीर मोहिता॥ ३२
श्रीनारदजीने कहा—वीरवर! जब राजा पुरंजनने अधीर-से होकर इस प्रकार याचना की, तब उस बालाने भी हँसते हुए उसका अनुमोदन किया। वह भी राजाको देखकर मोहित हो चुकी थी॥ ३२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.25.32 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 537) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/25/32/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
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