वीरवर! आज हम सब इस पुरीमें हैं—इसके सिवा मैं और कुछ नहीं जानती; मुझे इसका भी पता नहीं है कि हमारे रहनेके लिये यह पुरी किसने बनायी है॥ ३४॥✎ 13361337
इहाद्य सन्तमात्मानं विदाम न ततः परम्।
येनेयं निर्मिता वीर पुरी शरणमात्मनः॥ ३४
वीरवर! आज हम सब इस पुरीमें हैं—इसके सिवा मैं और कुछ नहीं जानती; मुझे इसका भी पता नहीं है कि हमारे रहनेके लिये यह पुरी किसने बनायी है॥ ३४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.25.34 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 537) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/25/34/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
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