श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.25.9

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 25 · अथ पञ्चविंशोऽध्यायः

अत्र ते कथयिष्येऽमुमितिहासं पुरातनम्।

पुरंजनस्य चरितं निबोध गदतो मम॥ ९

atra te kathayiṣye'mumitihāsaṃ purātanam|

puraṃjanasya caritaṃ nibodha gadato mama|| 9

अर्थ

अच्छा, इस विषयमें मैं तुम्हें एक प्राचीन उपाख्यान सुनाता हूँ। वह राजा पुरंजनका चरित्र है, उसे तुम मुझसे सावधान होकर सुनो॥ ९॥

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