श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.27.11

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 27 · अथ सप्तविंशोऽध्यायः

ईजे च क्रतुभिर्घोरैर्दीक्षितः पशुमारकैः।

देवान् पितॄन् भूतपतीन्‍नानाकामो यथा भवान्॥ ११

īje ca kratubhirghorairdīkṣitaḥ paśumārakaiḥ|

devān pitṝn bhūtapatīnnānākāmo yathā bhavān|| 11

अर्थ

फिर तुम्हारी तरह उसने भी अनेक प्रकारके भोगोंकी कामनासे यज्ञकी दीक्षा ले तरह-तरहके पशुहिंसामय घोर यज्ञोंसे देवता, पितर और भूतपतियोंकी आराधना की॥ ११॥✎ 1340

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1340 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): १२ → १२॥

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