पुरंजनको स्त्रीयोनिकी प्राप्ति और अविज्ञातके उपदेशसे उसका मुक्त होना
नारद उवाच
सैनिका भयनाम्नो ये बर्हिष्मन् दिष्टकारिणः।
प्रज्वारकालकन्याभ्यां विचेरुरवनीमिमाम्॥ १
sainikā bhayanāmno ye barhiṣman diṣṭakāriṇaḥ|
prajvārakālakanyābhyāṃ viceruravanīmimām|| 1
अर्थ
श्रीनारदजी कहते हैं—राजन्! फिर भय नामक यवनराजके आज्ञाकारी सैनिक प्रज्वार और कालकन्याके साथ इस पृथ्वीतलपर सर्वत्र विचरने लगे॥ १॥
सैनिका भयनाम्नो ये बर्हिष्मन् दिष्टकारिणः।
प्रज्वारकालकन्याभ्यां विचेरुरवनीमिमाम्॥ १
श्रीनारदजी कहते हैं—राजन्! फिर भय नामक यवनराजके आज्ञाकारी सैनिक प्रज्वार और कालकन्याके साथ इस पृथ्वीतलपर सर्वत्र विचरने लगे॥ १॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.28.1 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 546) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/28/1/