जब यह विदर्भनन्दिनी विवाहयोग्य हुई, तब विदर्भराजने घोषित कर दिया कि इसे सर्वश्रेष्ठ पराक्रमी वीर ही ब्याह सकेगा। तब शत्रुओंके नगरोंको जीतनेवाले पाण्ड्यनरेश महाराज मलयध्वजने समरभूमिमें समस्त राजाओंको जीतकर उसके साथ विवाह किया॥ २९॥
उपयेमे वीर्यपणां वैदर्भीं मलयध्वजः।
युधि निर्जित्य राजन्यान् पाण्ड्यः परपुरंजयः॥ २९
जब यह विदर्भनन्दिनी विवाहयोग्य हुई, तब विदर्भराजने घोषित कर दिया कि इसे सर्वश्रेष्ठ पराक्रमी वीर ही ब्याह सकेगा। तब शत्रुओंके नगरोंको जीतनेवाले पाण्ड्यनरेश महाराज मलयध्वजने समरभूमिमें समस्त राजाओंको जीतकर उसके साथ विवाह किया॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.28.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 549) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/28/29/