तब, जिसके चंगुलमें फँसकर पुरुष शीघ्र ही निःसार हो जाता है, वह कालकन्या बलात् उस पुरीकी प्रजाको भोगने लगी॥ ३॥
कालकन्यापि बुभुजे पुरंजनपुरं बलात्।
ययाभिभूतः पुरुषः सद्यो निःसारतामियात्॥ ३
तब, जिसके चंगुलमें फँसकर पुरुष शीघ्र ही निःसार हो जाता है, वह कालकन्या बलात् उस पुरीकी प्रजाको भोगने लगी॥ ३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.28.3 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 546) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/28/3/