पतिके साथ वनमें गयी हुई वह अबला इस प्रकार विलाप करती पतिके चरणोंमें गिर गयी और रो-रोकर आँसू बहाने लगी॥ ४९॥
एवं विलपती बाला विपिनेऽनुगता पतिम्।
पतिता पादयोर्भर्तू रुदत्यश्रूण्यवर्तयत्॥ ४९
पतिके साथ वनमें गयी हुई वह अबला इस प्रकार विलाप करती पतिके चरणोंमें गिर गयी और रो-रोकर आँसू बहाने लगी॥ ४९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.28.49 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 551) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/28/49/