श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.29.19

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 29 · अथैकोनत्रिंशोऽध्यायः

मनोरश्मिर्बुद्धिसूतो हृन्‍नीडो द्वन्द्वकूबरः।

पंचेन्द्रियार्थप्रक्षेपः सप्तधातुवरूथकः॥ १९

manoraśmirbuddhisūto hṛnnīḍo dvandvakūbaraḥ|

paṃcendriyārthaprakṣepaḥ saptadhātuvarūthakaḥ|| 19

अर्थ

मन बागडोर है, बुद्धि सारथि है, हृदय बैठनेका स्थान है, सुख-दुःखादि द्वन्द्व जुए हैं, इन्द्रियोंके पाँच विषय उसमें रखे हुए आयुध हैं और त्वचा आदि सात धातुएँ उसके आवरण हैं॥ १९॥

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