॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 4.29.19
मनोरश्मिर्बुद्धिसूतो हृन्नीडो द्वन्द्वकूबरः।
पंचेन्द्रियार्थप्रक्षेपः सप्तधातुवरूथकः॥ १९
manoraśmirbuddhisūto hṛnnīḍo dvandvakūbaraḥ|
paṃcendriyārthaprakṣepaḥ saptadhātuvarūthakaḥ|| 19
अर्थ
मन बागडोर है, बुद्धि सारथि है, हृदय बैठनेका स्थान है, सुख-दुःखादि द्वन्द्व जुए हैं, इन्द्रियोंके पाँच विषय उसमें रखे हुए आयुध हैं और त्वचा आदि सात धातुएँ उसके आवरण हैं॥ १९॥