श्रीनारदजी कहते हैं—पुरुषश्रेष्ठ! यहाँतक जो कुछ कहा गया है, उससे तुम्हारे प्रश्नका उत्तर हो गया। अब मैं एक भलीभाँति निश्चित किया हुआ गुप्त साधन बताता हूँ, ध्यान देकर सुनो॥ ५२॥
प्रश्न एवं हि संछिन्नो भवतः पुरुषर्षभ।
अत्र मे वदतो गुह्यं निशामय सुनिश्चितम्॥ ५२
श्रीनारदजी कहते हैं—पुरुषश्रेष्ठ! यहाँतक जो कुछ कहा गया है, उससे तुम्हारे प्रश्नका उत्तर हो गया। अब मैं एक भलीभाँति निश्चित किया हुआ गुप्त साधन बताता हूँ, ध्यान देकर सुनो॥ ५२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.29.52 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 559) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/29/52/