श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.29.80

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 29 · अथैकोनत्रिंशोऽध्यायः

मैत्रेय उवाच

भागवतमुख्यो भगवान्‍नारदो हंसयोर्गतिम्।

प्रदर्श्य ह्य२मुमामन्त्र्य सिद्धलोकं ततोऽगमत्॥ ८०

bhāgavatamukhyo bhagavānnārado haṃsayorgatim|

pradarśya hyamumāmantrya siddhalokaṃ tato'gamat|| 80

अर्थ

श्रीमैत्रेयजी कहते हैं—विदुरजी! भक्तश्रेष्ठ श्रीनारदजीने राजा प्राचीनबर्हिको जीव और ईश्‍वरके स्वरूपका दिग्दर्शन कराया। फिर वे उनसे विदा लेकर सिद्धलोकको चले गये॥ ८०॥

टिप्पणियाँ

  1. २

    प्रा० पा०—नृपमा०।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 563)

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