श्रीमैत्रेयजी कहते हैं—विदुरजी! भक्तश्रेष्ठ श्रीनारदजीने राजा प्राचीनबर्हिको जीव और ईश्वरके स्वरूपका दिग्दर्शन कराया। फिर वे उनसे विदा लेकर सिद्धलोकको चले गये॥ ८०॥
भागवतमुख्यो भगवान्नारदो हंसयोर्गतिम्।
प्रदर्श्य ह्यमुमामन्त्र्य सिद्धलोकं ततोऽगमत्॥ ८०
श्रीमैत्रेयजी कहते हैं—विदुरजी! भक्तश्रेष्ठ श्रीनारदजीने राजा प्राचीनबर्हिको जीव और ईश्वरके स्वरूपका दिग्दर्शन कराया। फिर वे उनसे विदा लेकर सिद्धलोकको चले गये॥ ८०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.29.80 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 563) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/29/80/