उस समय आकाशमार्गसे जाते हुए देवता आपसमें उस यज्ञकी चर्चा करते जाते थे। उनके मुखसे दक्षकुमारी सतीने अपने पिताके घर होनेवाले यज्ञकी बात सुन ली॥ ५॥
तदुपश्रुत्य नभसि खेचराणां प्रजल्पताम्।
सती दाक्षायणी देवी पितुर्यज्ञमहोत्सवम्॥ ५
उस समय आकाशमार्गसे जाते हुए देवता आपसमें उस यज्ञकी चर्चा करते जाते थे। उनके मुखसे दक्षकुमारी सतीने अपने पिताके घर होनेवाले यज्ञकी बात सुन ली॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.3.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 416) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/3/5/