तुम्हारे पिता आजकल मेरी सेवा (भक्ति)-में लगे हुए हैं; उन्होंने तुम्हें सन्तान उत्पन्न करनेकी आज्ञा दी है। अतः तुम शीघ्र ही उस देवोपम सुन्दरी कन्यासे विवाह कर लो॥ १५॥✎ 1915
प्रजाविसर्ग आदिष्टाः पित्रा मामनुवर्तता।
तत्र कन्यां वरारोहां तामुद्वहत माचिरम्॥ १५
तुम्हारे पिता आजकल मेरी सेवा (भक्ति)-में लगे हुए हैं; उन्होंने तुम्हें सन्तान उत्पन्न करनेकी आज्ञा दी है। अतः तुम शीघ्र ही उस देवोपम सुन्दरी कन्यासे विवाह कर लो॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.30.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 566) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/30/15/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1915 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): ज्ञान-स्वरूप → ज्ञानस्वरूप