श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.30.22

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 30 · अथ त्रिंशोऽध्यायः

प्रचेतस ऊचुः

नमो नमः क्लेशविनाशनाय

निरूपितोदारगुणाह्वयाय ।

मनोवचोवेगपुरोजवाय

सर्वाक्षमार्गैरगताध्वने नमः॥ २२

namo namaḥ kleśavināśanāya

nirūpitodāraguṇāhvayāya |

manovacovegapurojavāya

sarvākṣamārgairagatādhvane namaḥ|| 22

अर्थ

प्रचेताओंने कहा—प्रभो! आप भक्तोंके क्लेश दूर करनेवाले हैं, हम आपको नमस्कार करते हैं। वेद आपके उदार गुण और नामोंका निरूपण करते हैं। आपका वेग मन और वाणीके वेगसे भी बढ़कर है तथा आपका स्वरूप सभी इन्द्रियोंकी गतिसे परे है। हम आपको बार-बार नमस्कार करते हैं॥ २२॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें