आप कमलकुसुमकी केसरके समान स्वच्छ पीताम्बर धारण किये हुए हैं, समस्त भूतोंके आश्रयस्थान हैं तथा सबके साक्षी हैं; हम आपको नमस्कार करते हैं॥ २६॥
नमः कमलकिंजल्कपिशंगामलवाससे।
सर्वभूतनिवासाय नमोऽयुङ्क्ष्महि साक्षिणे॥ २६
आप कमलकुसुमकी केसरके समान स्वच्छ पीताम्बर धारण किये हुए हैं, समस्त भूतोंके आश्रयस्थान हैं तथा सबके साक्षी हैं; हम आपको नमस्कार करते हैं॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.30.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 567) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/30/26/