हम आपसे केवल यही माँगते हैं कि जबतक आपकी मायासे मोहित होकर हम अपने कर्मानुसार संसारमें भ्रमते रहें, तबतक जन्म-जन्ममें हमें आपके प्रेमी भक्तोंका संग प्राप्त होता रहे॥ ३३॥✎ 4231348
यावत्ते मायया स्पृष्टा भ्रमाम इह कर्मभिः।
तावद्भवत्प्रसंगानां संगः स्यान्नो भवे भवे॥ ३३
हम आपसे केवल यही माँगते हैं कि जबतक आपकी मायासे मोहित होकर हम अपने कर्मानुसार संसारमें भ्रमते रहें, तबतक जन्म-जन्ममें हमें आपके प्रेमी भक्तोंका संग प्राप्त होता रहे॥ ३३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.30.33 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 568) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/30/33/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)