श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.6.12

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

मयूरकेकाभिरुतं मदान्धालिविमूर्च्छितम्।

प्लावितै रक्तकण्ठानां कूजितैश्‍च पतत्त्रिणाम्॥ १२

mayūrakekābhirutaṃ madāndhālivimūrcchitam|

plāvitai raktakaṇṭhānāṃ kūjitaiśca patattriṇām|| 12

अर्थ

वह सब ओर मोरोंके शोर, मदान्ध भ्रमरोंके गुंजार, कोयलोंकी कुहू-कुहू ध्वनि तथा अन्यान्य पक्षियोंके कलरवसे गूँज रहा है॥ १२॥

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