श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.6.27

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

तारहेममहारत्नविमानशतसंकुलाम् ।

जुष्टां पुण्यजनस्त्रीभिर्यथा खं सतडिद्घनम्॥ २७

tārahemamahāratnavimānaśatasaṃkulām |

juṣṭāṃ puṇyajanastrībhiryathā khaṃ sataḍidghanam|| 27

अर्थ

अलकापुरीपर चाँदी, सोने और बहुमूल्य मणियोंके सैकड़ों विमान छाये हुए थे, जिनमें अनेकों यक्षपत्नियाँ निवास करती थीं। इनके कारण वह विशाल नगरी बिजली और बादलोंसे छाये हुए आकाशके समान जान पड़ती थी॥ २७॥

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