उन्होंने महादेवजीकी स्तुति करनी चाही, किन्तु अपनी मरी हुई बेटी सतीका स्मरण हो आनेसे स्नेह और उत्कण्ठाके कारण उनके नेत्रोंमें आँसू भर आये। उनके मुखसे शब्द न निकल सका॥ ११॥
भवस्तवाय कृतधीर्नाशक्नोदनुरागतः।
औत्कण्ठ्याद्बाष्पकलया सम्परेतां सुतां स्मरन्॥ ११
उन्होंने महादेवजीकी स्तुति करनी चाही, किन्तु अपनी मरी हुई बेटी सतीका स्मरण हो आनेसे स्नेह और उत्कण्ठाके कारण उनके नेत्रोंमें आँसू भर आये। उनके मुखसे शब्द न निकल सका॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.7.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 435) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/7/11/