dharma eva matiṃ dattvā tridaśāste divaṃ yayuḥ|| 57
अर्थ
फिर जिन्हें अपने पुरुषार्थसे ही सब प्रकारकी सिद्धियाँ प्राप्त थीं, उन दक्षप्रजापतिको ‘तुम्हारी सदा धर्ममें बुद्धि रहे’ ऐसा आशीर्वाद देकर सब देवता स्वर्गलोकको चले गये॥ ५७॥
तस्मा अप्यनुभावेन स्वेनैवावाप्तराधसे।
धर्म एव मतिं दत्त्वा त्रिदशास्ते दिवं ययुः॥ ५७
फिर जिन्हें अपने पुरुषार्थसे ही सब प्रकारकी सिद्धियाँ प्राप्त थीं, उन दक्षप्रजापतिको ‘तुम्हारी सदा धर्ममें बुद्धि रहे’ ऐसा आशीर्वाद देकर सब देवता स्वर्गलोकको चले गये॥ ५७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.7.57 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 442) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/7/57/