ताभ्यां क्रोधश्च हिंसा च यद्दुरुक्तिः स्वसा कलिः॥ ३
tayoḥ samabhavallobho nikṛtiśca mahāmate|
tābhyāṃ krodhaśca hiṃsā ca yadduruktiḥ svasā kaliḥ|| 3
अर्थ
दम्भ और मायासे लोभ और निकृति (शठता)-का जन्म हुआ, उनसे क्रोध और हिंसा तथा उनसे कलि (कलह) और उसकी बहिन दुरुक्ति (गाली) उत्पन्न हुए॥ ३॥✎ 13211322
तयोः समभवल्लोभो निकृतिश्च महामते।
ताभ्यां क्रोधश्च हिंसा च यद्दुरुक्तिः स्वसा कलिः॥ ३
दम्भ और मायासे लोभ और निकृति (शठता)-का जन्म हुआ, उनसे क्रोध और हिंसा तथा उनसे कलि (कलह) और उसकी बहिन दुरुक्ति (गाली) उत्पन्न हुए॥ ३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.8.3 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 443) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/8/3/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#1321 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): निऋर्ति → निऋर्ऋति
#1322 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): निऋर्ऋति → निर्ऋति