उनके वक्षःस्थलमें श्रीवत्सका चिह्न है; उनका शरीर सजल जलधरके समान श्यामवर्ण है; वे परम पुरुष श्यामसुन्दर गलेमें वनमाला धारण किये हुए हैं और उनकी चार भुजाओंमें शंख, चक्र, गदा एवं पद्म सुशोभित हैं॥ ४७॥✎ 369
श्रीवत्साङ्कं घनश्यामं पुरुषं वनमालिनम्।
शङ्खचक्रगदापद्मैरभिव्यक्तचतुर्भुजम् ॥ ४७
उनके वक्षःस्थलमें श्रीवत्सका चिह्न है; उनका शरीर सजल जलधरके समान श्यामवर्ण है; वे परम पुरुष श्यामसुन्दर गलेमें वनमाला धारण किये हुए हैं और उनकी चार भुजाओंमें शंख, चक्र, गदा एवं पद्म सुशोभित हैं॥ ४७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.8.47 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 448) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/8/47/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)