श्रीनारदजीने कहा—राजन्! तुम अपने बालककी चिन्ता मत करो। उसके रक्षक भगवान् हैं। तुम्हें उसके प्रभावका पता नहीं है, उसका यश सारे जगत्में फैल रहा है॥ ६८॥
मा मा शुचः स्वतनयं देवगुप्तं विशाम्पते।
तत्प्रभावमविज्ञाय प्रावृङ्क्ते यद्यशो जगत्॥ ६८
श्रीनारदजीने कहा—राजन्! तुम अपने बालककी चिन्ता मत करो। उसके रक्षक भगवान् हैं। तुम्हें उसके प्रभावका पता नहीं है, उसका यश सारे जगत्में फैल रहा है॥ ६८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.8.68 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 450) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/8/68/