श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.8.7

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

प्रियव्रतोत्तानपादौ शतरूपापतेः सुतौ।

वासुदेवस्य कलया रक्षायां जगतः स्थितौ॥ ७

priyavratottānapādau śatarūpāpateḥ sutau|

vāsudevasya kalayā rakṣāyāṃ jagataḥ sthitau|| 7

अर्थ

महारानी शतरूपा और उनके पति स्वायम्भुव मनुसे प्रियव्रत और उत्तानपाद—ये दो पुत्र हुए। भगवान् वासुदेवकी कलासे उत्पन्‍न होनेके कारण ये दोनों संसारकी रक्षामें तत्पर रहते थे॥ ७॥

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