उन्होंने तीन-तीन रात्रिके अन्तरसे शरीरनिर्वाहके लिये केवल कैथ और बेरके फल खाकर श्रीहरिकी उपासना करते हुए एक मास व्यतीत किया॥ ७२॥✎ 3721323
त्रिरात्रान्ते त्रिरात्रान्ते कपित्थबदराशनः।
आत्मवृत्त्यनुसारेण मासं निन्येऽर्चयन्हरिम्॥ ७२
उन्होंने तीन-तीन रात्रिके अन्तरसे शरीरनिर्वाहके लिये केवल कैथ और बेरके फल खाकर श्रीहरिकी उपासना करते हुए एक मास व्यतीत किया॥ ७२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.8.72 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 450) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/8/72/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)