श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.8.81

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

देवा ऊचुः

नैवं विदामो भगवन् प्राणरोधं

चराचरस्याखिलसत्त्वधाम्नः ।

विधेहि तन्‍नो वृजिनाद्विमोक्षं

प्राप्ता वयं त्वां शरणं शरण्यम्॥ ८१

naivaṃ vidāmo bhagavan prāṇarodhaṃ

carācarasyākhilasattvadhāmnaḥ |

vidhehi tanno vṛjinādvimokṣaṃ

prāptā vayaṃ tvāṃ śaraṇaṃ śaraṇyam|| 81

अर्थ

देवताओंने कहा—भगवन्! समस्त स्थावर-जंगम जीवोंके शरीरोंका प्राण एक साथ ही रुक गया है ऐसा तो हमने पहले कभी अनुभव नहीं किया। आप शरणागतोंकी रक्षा करनेवाले हैं, अपनी शरणमें आये हुए हमलोगोंको इस दुःखसे छुड़ाइये॥ ८१॥

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