अन्वेषन्ती वनं माता दावाग्निं सा प्रवेक्ष्यति॥ २३
tvadbhrātaryuttame naṣṭe mṛgayāyāṃ tu tanmanāḥ|
anveṣantī vanaṃ mātā dāvāgniṃ sā pravekṣyati|| 23
अर्थ
आगे चलकर किसी समय तेरा भाई उत्तम शिकार खेलता हुआ मारा जायगा, तब उसकी माता सुरुचि पुत्र-प्रेममें पागल होकर उसे वनमें खोजती हुई दावानलमें प्रवेश कर जायगी॥ २३॥
त्वद्भ्रातर्युत्तमे नष्टे मृगयायां तु तन्मनाः।
अन्वेषन्ती वनं माता दावाग्निं सा प्रवेक्ष्यति॥ २३
आगे चलकर किसी समय तेरा भाई उत्तम शिकार खेलता हुआ मारा जायगा, तब उसकी माता सुरुचि पुत्र-प्रेममें पागल होकर उसे वनमें खोजती हुई दावानलमें प्रवेश कर जायगी॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.9.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 455) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/9/23/