॥ श्रीहरिः ॥
तत्र तत्रोपसंक्लृप्तैर्लसन्मकरतोरणैः।
सवृन्दैः कदलीस्तम्भैः पूगपोतैश्च तद्विधैः॥ ५४
tatra tatropasaṃklṛptairlasanmakaratoraṇaiḥ|
savṛndaiḥ kadalīstambhaiḥ pūgapotaiśca tadvidhaiḥ|| 54
अर्थ
नगरमें जहाँ-तहाँ मगरके आकारके सुन्दर दरवाजे बनाये गये थे तथा फल-फूलोंके गुच्छोंके सहित केलेके खम्भे और सुपारीके पौधे सजाये गये थे॥ ५४॥
तत्र तत्रोपसंक्लृप्तैर्लसन्मकरतोरणैः।
सवृन्दैः कदलीस्तम्भैः पूगपोतैश्च तद्विधैः॥ ५४
नगरमें जहाँ-तहाँ मगरके आकारके सुन्दर दरवाजे बनाये गये थे तथा फल-फूलोंके गुच्छोंके सहित केलेके खम्भे और सुपारीके पौधे सजाये गये थे॥ ५४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.9.54 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 459) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/9/54/