श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.9.54

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

तत्र तत्रोपसंक्लृप्तैर्लसन्मकरतोरणैः।

सवृन्दैः कदलीस्तम्भैः पूगपोतैश्‍च तद्विधैः॥ ५४

tatra tatropasaṃklṛptairlasanmakaratoraṇaiḥ|

savṛndaiḥ kadalīstambhaiḥ pūgapotaiśca tadvidhaiḥ|| 54

अर्थ

नगरमें जहाँ-तहाँ मगरके आकारके सुन्दर दरवाजे बनाये गये थे तथा फल-फूलोंके गुच्छोंके सहित केलेके खम्भे और सुपारीके पौधे सजाये गये थे॥ ५४॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें