॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 5.13.23
नमो महद्भ्योऽस्तु नमः शिशुभ्यो
नमो युवभ्यो नम आ वटुभ्यः।
ये ब्राह्मणा गामवधूतलिङ्गा-
श्चरन्ति तेभ्यः शिवमस्तु राज्ञाम्॥ २३
namo mahadbhyo'stu namaḥ śiśubhyo
namo yuvabhyo nama ā vaṭubhyaḥ|
ye brāhmaṇā gāmavadhūtaliṅgā-
ścaranti tebhyaḥ śivamastu rājñām|| 23
अर्थ
ब्रह्मज्ञानियोंमें जो वयोवृद्ध हों, उन्हें नमस्कार है; जो शिशु हों, उन्हें नमस्कार है; जो युवा हों, उन्हें नमस्कार है। जो क्रीडारत बालक हों, उन्हें भी नमस्कार है। जो ब्रह्मज्ञानी ब्राह्मण अवधूतवेषसे पृथ्वीपर विचरते हैं, उनसे हम-जैसे ऐश्वर्योन्मत्त राजाओंका कल्याण हो॥ २३॥