लोकालोकपर्वत सूर्य आदिसे प्रकाशित और अप्रकाशित भूभागोंके बीचमें है, इससे इसका यह नाम पड़ा है॥ ३६॥✎ 13571358
लोकालोक इति समाख्या यदनेनाचलेन लोकालोकस्यान्तर्वर्तिनावस्थाप्यते॥ ३६॥
लोकालोकपर्वत सूर्य आदिसे प्रकाशित और अप्रकाशित भूभागोंके बीचमें है, इससे इसका यह नाम पड़ा है॥ ३६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 5.20.36 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 667) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/5/20/36/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#1357 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): धु्रवपर्यन्त → धु्रुवपर्यन्त
#1358 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): धु्रुवपर्यन्त → ध्रुवपर्यन्त