सूर्यदेवके आगे उन्हींकी ओर मुँह करके बैठे हुए अरुण उनके सारथिका कार्य करते हैं॥ १६॥
पुरस्तात्सवितुररुणः पश्चाच्च नियुक्तः सौत्ये कर्मणि किलास्ते॥ १६॥
सूर्यदेवके आगे उन्हींकी ओर मुँह करके बैठे हुए अरुण उनके सारथिका कार्य करते हैं॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 5.21.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 671) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/5/21/16/