भगवान् सूर्यके आगे अँगूठेके पोरुएके बराबर आकारवाले वालखिल्यादि साठ हजार ऋषि स्वस्तिवाचनके लिये नियुक्त हैं। वे उनकी स्तुति करते रहते हैं॥ १७॥
तथा वालखिल्या ऋषयः अङ्गुष्ठपर्वमात्राः षष्टिसहस्राणि पुरतः सूर्यं सूक्तवाकाय नियुक्ताः संस्तुवन्ति॥ १७॥
भगवान् सूर्यके आगे अँगूठेके पोरुएके बराबर आकारवाले वालखिल्यादि साठ हजार ऋषि स्वस्तिवाचनके लिये नियुक्त हैं। वे उनकी स्तुति करते रहते हैं॥ १७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 5.21.17 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 671) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/5/21/17/