श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 5.24.14

पञ्चम स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

न हि तेषां कल्याणानां प्रभवति कुतश्‍चन मृत्युर्विना भगवत्तेजसश्‍चक्रापदेशात्॥ १४॥ यस्मिन् प्रविष्टेऽसुरवधूनां प्रायः पुंसवनानि भयादेव स्रवन्ति पतन्ति च॥ १५॥

na hi teṣāṃ kalyāṇānāṃ prabhavati kutaścana mṛtyurvinā bhagavattejasaścakrāpadeśāt|| 14||

अर्थ

उन पुण्यपुरुषोंकी भगवान्‌के तेजरूप सुदर्शन चक्रके सिवा और किसी साधनसे मृत्यु नहीं हो सकती॥ १४॥

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