सुदर्शन चक्रके तो आते ही भयके कारण असुररमणियोंका गर्भस्राव और गर्भपात* हो जाता है॥ १५॥
यस्मिन् प्रविष्टेऽसुरवधूनां प्रायः पुंसवनानि भयादेव स्रवन्ति पतन्ति च॥ १५॥
सुदर्शन चक्रके तो आते ही भयके कारण असुररमणियोंका गर्भस्राव और गर्भपात हो जाता है॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 5.24.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 679) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/5/24/15/
टिप्पणियाँ
*
‘आचतुर्थाद्भवेत्स्रावः पातः पंचमषष्ठयोः’ अर्थात् चौथे मासतक जो गर्भ गिरता है, उसे ‘गर्भस्राव’ कहते हैं तथा पाँचवें और छठे मासमें गिरनेसे वह ‘गर्भपात’ कहलाता है।