tasya mahānubhāvasyānupathamamṛjitakaṣāyaḥ ko vāsmadvidhaḥ parihīṇabhagavadanugraha upajigamiṣatīti|| 26||
अर्थ
वे बड़े महानुभाव थे। मुझपर तो न भगवान्की कृपा ही है और न मेरी वासनाएँ ही शान्त हुई हैं; फिर मेरे-जैसा कौन पुरुष उनके पास पहुँचनेका साहस कर सकता है?॥ २६॥✎ 481482483
तस्य महानुभावस्यानुपथममृजितकषायः को वास्मद्विधः परिहीणभगवदनुग्रह उपजिगमिषतीति॥ २६॥
वे बड़े महानुभाव थे। मुझपर तो न भगवान्की कृपा ही है और न मेरी वासनाएँ ही शान्त हुई हैं; फिर मेरे-जैसा कौन पुरुष उनके पास पहुँचनेका साहस कर सकता है?॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 5.24.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 681) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/5/24/26/