श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 5.26.1

पञ्चम स्कन्ध · अध्याय 26 · अथ षड्विंशोऽध्यायः

अथ षड्विंशोऽध्यायः

नरकोंकी विभिन्‍न गतियोंका वर्णन

राजोवाच

महर्ष एतद्वैचित्र्यं लोकस्य कथमिति॥ १॥

maharṣa etadvaicitryaṃ lokasya kathamiti|| 1||

अर्थ

राजा परीक्षित‍्ने पूछा—महर्षे! लोगोंको जो ये ऊँची-नीची गतियाँ प्राप्त होती हैं, उनमें इतनी विभिन्‍नता क्यों है?॥ १॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें