ये त्विह वै श्वगर्दभपतयो ब्राह्मणादयो मृगयाविहारा अतीर्थे च मृगान्निघ्नन्ति तानपि सम्परेताल्ँलक्ष्यभूतान् यमपुरुषा इषुभिर्विध्यन्ति॥ २४॥
ye tviha vai śvagardabhapatayo brāhmaṇādayo mṛgayāvihārā atīrthe ca mṛgānnighnanti tānapi samparetālm̐lakṣyabhūtān yamapuruṣā iṣubhirvidhyanti|| 24||
अर्थ
इस लोकमें जो ब्राह्मणादि उच्च वर्णके लोग कुत्ते या गधे पालते और शिकार आदिमें लगे रहते हैं तथा शास्त्रके विपरीत पशुओंका वध करते हैं, मरनेके पश्चात् वे प्राणरोध नरकमें डाले जाते हैं और वहाँ यमदूत उन्हें लक्ष्य बनाकर बाणोंसे बींधते हैं॥ २४॥
ये त्विह वै श्वगर्दभपतयो ब्राह्मणादयो मृगयाविहारा अतीर्थे च मृगान्निघ्नन्ति तानपि सम्परेताल्ँलक्ष्यभूतान् यमपुरुषा इषुभिर्विध्यन्ति॥ २४॥
इस लोकमें जो ब्राह्मणादि उच्च वर्णके लोग कुत्ते या गधे पालते और शिकार आदिमें लगे रहते हैं तथा शास्त्रके विपरीत पशुओंका वध करते हैं, मरनेके पश्चात् वे प्राणरोध नरकमें डाले जाते हैं और वहाँ यमदूत उन्हें लक्ष्य बनाकर बाणोंसे बींधते हैं॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 5.26.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 691) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/5/26/24/