श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 5.26.4

पञ्चम स्कन्ध · अध्याय 26 · अथ षड्विंशोऽध्यायः

राजोवाच

नरका नाम भगवन् किं देशविशेषा अथवा बहिस्त्रिलोक्या आहोस्विदन्तराल इति॥ ४॥

narakā nāma bhagavan kiṃ deśaviśeṣā athavā bahistrilokyā āhosvidantarāla iti|| 4||

अर्थ

राजा परीक्षित‍्ने पूछा—भगवन्! आप जिनका वर्णन करना चाहते हैं, वे नरक इसी पृथ्वीके कोई देशविशेष हैं अथवा त्रिलोकीसे बाहर या इसीके भीतर किसी जगह हैं?॥ ४॥

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