॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 5.4.12
इति भागवतधर्मदर्शना नव महाभागवतास्तेषां सुचरितं भगवन्महिमोपबृंहितं वसुदेवनारदसंवादमुपशमायनमुपरिष्टाद् वर्णयिष्यामः॥ १२॥ यवीयांस एकाशीतिर्जायन्तेयाः पितुरादेशकरा महाशालीना महाश्रोत्रिया यज्ञशीलाः कर्मविशुद्धा१ ब्राह्मणा बभूवुः॥ १३॥
iti bhāgavatadharmadarśanā nava mahābhāgavatāsteṣāṃ sucaritaṃ bhagavanmahimopabṛṃhitaṃ vasudevanāradasaṃvādamupaśamāyanamupariṣṭād varṇayiṣyāmaḥ|| 12||
अर्थ
उनसे छोटे कवि, हरि, अन्तरिक्ष, प्रबुद्ध, पिप्पलायन, आविर्होत्र, द्रुमिल, चमस और करभाजन—ये नौ राजकुमार भागवतधर्मका प्रचार करनेवाले बड़े भगवद्भक्त थे। भगवान्की महिमासे महिमान्वित और परम शान्तिसे पूर्ण इनका पवित्र चरित हम नारद-वसुदेवसंवादके प्रसंगसे आगे (एकादश स्कन्धमें) कहेंगे॥ ११-१२॥✎ 440
टिप्पणियाँ
- १
प्रा० पा०—कर्मशुद्धा।