श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 5.6.12

पञ्चम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

अयमवतारो रजसोपप्लुतकैवल्योपशिक्षणार्थः ॥ १२॥
तस्यानुगुणान् श्लोकान् गायन्ति—

ayamavatāro rajasopaplutakaivalyopaśikṣaṇārthaḥ || 12||

अर्थ

भगवान्का यह अवतार रजोगुणसे भरे हुए लोगोंको मोक्षमार्गकी शिक्षा देनेके लिये ही हुआ था॥ १२॥

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