॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 6.1.22
बन्द्यक्षकैतवैश्चोर्यैर्गर्हितां वृत्तिमास्थितः।
बिभ्रत्कुटुम्बमशुचिर्यातयामास देहिनः॥ २२
bandyakṣakaitavaiścoryairgarhitāṃ vṛttimāsthitaḥ|
bibhratkuṭumbamaśuciryātayāmāsa dehinaḥ|| 22
अर्थ
वह पतित कभी बटोहियोंको बाँधकर उन्हें लूट लेता, कभी लोगोंको जूएके छलसे हरा देता, किसीका धन धोखा-धड़ीसे ले लेता तो किसीका चुरा लेता। इस प्रकार अत्यन्त निन्दनीय वृत्तिका आश्रय लेकर वह अपने कुटुम्बका पेट भरता था और दूसरे प्राणियोंको बहुत ही सताता था॥ २२॥